Wednesday, June 18, 2008

कुछ दिनों के बाद और शायरी

जिसे हम कब से भुलाये बैठे थे , वो आज अचानक ही याद आ गये, जिस गम की बारिश ने किया था बरबाद , उसी बारिश के बदल आज फ़िर छा गये ।

खुशी का हर एक पल हो तुम्हारे लिए, बहारों का गुलिस्ता हो तुम्हारे लिए , कामयाबी की मंजिल हो तुम्हारे लिए, बस एक पल तुम्हारा हो हमारे लिए ।

जाम टूटने का बहाना ना कर, हम तो तेरी आंखों से पी लेंगे । तू मत आ लेकिन आने का वडा तो कर, हम तेरे इन्तेज़ार मे ही जी लेंगे ।

फ़िर दिन ढल गया फिर रात आ गई , फिर तन्हाई मे जाने की बात आ गयी , अभी तो तारों की पनाह मे बैठे थे, की चाँद को देखा तो आप की याद आ गयी ।

तू तनहा है तो तेरी तन्हारी में हम रहेंगे , तू उदास है तो तेरे साथ हम भी उदास रहेंगे तुझे नज़र न आयेंगे पर फ़िर भी हर मोड़ पर तेरे साथ हम रहेंगे ।

गुनाह बन गयी है उम्मीद प्यार की दिल में सजाये बैठे है तस्वीर यार की , बहते आंसुओं की कहानी दुनिया ने जान ली, पर उनको कब होगी ख़बर दिल ऐ बेकरार की ।


1 comment:

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.