Sunday, July 27, 2008

आओ शायरी की दुनिया में

लिखने से पहले सलाम करते है, दर्द इस दिल से पैगाम करते हैं,
ये मत समझना के भूल गए है हम, याद तोः आपको हम सुबह शाम करते है ।

नाराज़ होकर जिंदगी से नाता नही तोड़ते, मुश्किल हो राह फ़िर भी मंजिल नही छोड़ते,
तनहा ना समझना खुदको कभी, हम उनमे से नही है, जो कभी साथ नही छोड़ ते ।

बरसात की हर बूँद मे समाये हो तुम, हर दिल मे ख़ास जगह बनाये हो तुम ,
यूँ तोह हमदर्द की कमी नही, पर ना जाने आज बहुत याद आ रहे हो तुम ।


एक फूल अजीब था, कभी हमारे भी बहुत करीब था, जब हम चाहने लगे उसे,
तो पता चला वो किसी दूसरे का नसीब था ।

सबको प्यार देने की आदत है हमें, अपनी अलग पहचान बनने की आदत है हमें
कितना भी ज़ख्म दे हमें कोई, उतना ही मुस्कराने की आदत है हमें ।


taras te हुए उसके हाथों ने , तेरी कलाई को इस कदर छुआ है ,
जैसे उसकी धड़कन पुच रही हो, भइया टाइम क्या हुआ है ?

जब आसमान गरजता होगा, तो मौसम भी अपना रंग बदलता होगा,
जब उठती होगी आप की निगाहें, तो खुदा भी गिर गिर कर संभालता होगा ।

साथी सिर्फ़ वोह नही होता, जो जीवन भर साथ निभाएं, साथ तो वो होता है जो जीवन के कुछ पलों में ही जीवन भर के साथ दे जाए ।

मेरी रातें तेरी यादों से सजी रहती हैंमेरी साँसे तेरी खुसबू में बसी रहती हैंमेरी आँखों में तेरा सपना सजा रहता हैहां मेरे दिल में तेरा अक्स बसा रहता है

मत पुच मेरे सब्र की इन्तहा कहाँ तक है, तू सितम करले तेरी ताकत जहाँ तक है,
वफ़ा की उमीद जिन्हें होंगी उन्हें होंगी, हमें तो देखना है की तू जालिम कहाँ तक है ।



2 comments:

परमजीत बाली said...

बढिया शायरी है।

नाराज़ होकर जिंदगी से नाता नही तोड़ते, मुश्किल हो राह फ़िर भी मंजिल नही छोड़ते,
तनहा ना समझना खुदको कभी, हम उनमे से नही है, जो कभी साथ नही छोड़ दे ।

Abhi said...

very nice shayri
an i Hope u will more than better shayri for us