Sunday, December 7, 2008

एक अरसे के बाद आया हूँ

तू पिला मुझे थोडी सी, मगर जोश ऐ तम्मना डाल कर
तू दे मुझे कतरा मगर कतरे में दरिया डाल कर

हुई मुझसे मेरी मोहब्बत रुसवा, हम उनको अपने दिल के नगर में धुन्ढ़ते है
न जाने कहाँ ले जायेगी मुझे ज़िन्दगी मेरी
थक कर हम उनके डर ओ दिवार को चुमते है

तुझे क्या पता ग़म किसे कहते है, अरे तुझे क्या पता ग़म किसे कहते है
तुने तोह हमेशा Cellotape ही use किया है

हो आपकी जिंदगी में खुशियों का मेला, कभी न आए कोई झमेला
सदा सुखी रहे आप का बसेरा

खुदा हमारी तरह तुम्हे तन्हाई ना दे, हम जी लेंगे तनहा पर तुम्हे जुदाई ना
हमारी निगाहों में बसी रहे आपकी
सूरत
आपको भले ही हम दिखाई ना दे


जुगनू को कैद कर के मुस्कराया न करो, रौशनी की खातिर किसी का दिल जलाया ना करो,
सितम करना है करो पर इतना ना करो, याद नही कर सकते तोह याद आया ना करो

कौन कहता है खामोशिया, खामोश होती है, खामोशियों को खामोशी से सुनो, क्या पता
खामोशिया वोह कह दे जिनकी आपको लफ्जों में तलाश होती है

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