Sunday, September 7, 2008

रोक के राखी थी Shayri

दुआ है के तेरी ज़िन्दगी में कोई ग़म न हो, दुआ है की तेरी मुस्कान कभी कम ना हो
अगर कभी तेरी पलकों में आँसू आए तो दुआ है के उस की वजह कभी हम ना हो

लफ्ज़ तुम दो, गीत हम बनायेंगे, मंजिल तुम चुनो, रास्ता हम बताएँगे
खुश तुम रहो, खुशियाँ हम दिलाएंगे। तुम बस दोस्त बन कर रहना दोस्ती हम निभाएंगे

2 comments:

विवेक सिँह said...

अच्छा है. बेहतरीन है . बधाई.

संगीता पुरी said...

तुम बस दोस्त बन कर रहना दोस्ती हम निभाएंगे
बहुत अच्छा।