Tuesday, September 23, 2008

हम फ़िर आ गए

उन दोस्तों का बोहत बोहत शुक्रिया जो COMMENTS लिख रहे है

सबके चाहने से कोई बात नही होती, थोड़े से अंधेरे से रात नही होती
जो ज़िन्दगी में सबसे ज़्यादा पसंद है, क्या करे उसी से रोज़ मुलाकात नही होती

मिल
जाए हर कोई यूँ ही राहों में, तो कैसे पता चले की इंतज़ार क्या होता है
तड़प के देखो किसी की चाहत में, तो पता चले प्यार क्या होता है

क्या होगा कोई जानता नही, मुश्किल की घड़ी में कोई पहचानता नही,
भूल जायेगा ज़माना सारा, पर आप भूल जायेंगे, ये दिल मानता नही

होंठ नही कह सकते जो अफसाना दिल का शायद नज़र से वो बात हो जाए
इस उम्मीद से करते हैं इंतज़ार रात का के शायद सपनो में आपसे मुलाक़ात हो जाए



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